Tuesday, 26 January 2016

Kavita- Dasharat solanki (Jalor)



विश्व बालिका दिवस परआज ही " बिटिया" शीर्षक से 

लिखी रचना , इसे जिला स्तरीय समारोह में भी प्रस्तुत

किया ................... हालातों को किस कदर मोडतीं हैं बेटियाँ..

.. संबंधों के टूटे तार जोड़तीं हैं बेटियाँ..! *******

छम छम बजे पायल मंदिर की घंटी जैसे 

, नन्हे नन्हे पाँवों से जब दौड़तीं हैं बेटियाँ...!

******* सृष्टि के शिखरों को श्रम से छू जातीं ,

वर्जनाओं के पहाड़ जब तोड़तीं हैं बेटियाँ...!

******* ब्रज के धाम जैसे पावन अहसास आते

, श्रृंगार में स्नेह-रस निचोड़तीं हैं बेटियाँ ...!

******* फैल जातीं विश्व में अनंत हृद - भावों से

, समाईं बिंदु में जब स्व- सिकोड़तीं है बेटियाँ...!

******* घर का कोना कोना , यादों की हिलोर देता

, बाबुल की बगिया को जब छोड़तीं हैं बेटियाँ...!!